Sunday, January 26, 2014

मन की बात

सभी पाठकगण को मेरा नमस्कार

दो दिन पहले एक प्यारि सी बहुत से  रंग अपने परों पे लेकर उड़ती  हुई तितली,  मेरे समीप से गुजरी,उसकी इस अदा ने मुझे उसे देखने और उसको निहारने का निमंत्रण जो दे दिया था ,फिर क्या,,, वो फूलों पे उठतीं  बैठतीं रही ,न जाने कितने रंग  समेटती रही.…।और मुझे मुस्कान देती रहीं ,,,,,,यही  तो हे दो बूँद मुस्कान   

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