सभी पाठकगण को मेरा नमस्कार
दो दिन पहले एक प्यारि सी बहुत से रंग अपने परों पे लेकर उड़ती हुई तितली, मेरे समीप से गुजरी,उसकी इस अदा ने मुझे उसे देखने और उसको निहारने का निमंत्रण जो दे दिया था ,फिर क्या,,, वो फूलों पे उठतीं बैठतीं रही ,न जाने कितने रंग समेटती रही.…।और मुझे मुस्कान देती रहीं ,,,,,,यही तो हे दो बूँद मुस्कान
Nice Sir
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